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जर्सी No.7 ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी की कहानी है जिसका जुनून, सनक, पागलपन, बौखलाहट, उधेड़बुन, ख़्वाहिश, आरज़ू, उम्मीद, सफलता सिर्फ़ और सिर्फ़ उसका खेल। दूसरी तरफ एक ज़िम्मेदार पुत्र की तरह परिवार के लिए ख़ुद के जुनून को जलाकर उसकी भस्म की अग्नि को हृदय में लिए जिए जा रहा है।



 

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मेरी आवाज़ में ये जो शोर है

मेरी आवाज़ में ये जो शोर है...  ये मैं नहीं कोई और है....  काय काय करता जिस्म चितचोर है....  चारों तरफ मचा कोलाहल ये कैसा दौर है। ... - चीची 
 Short Story  "क़िस्सा बारहवीं कक्षा का "  पी. टी. आई. साहेब स्कूल के सबसे खड़ूस, ख़तरनाक और निर्दायी। उनके नाम से पतलून गीली और गला सूख जाता। जिस कक्षा में वो घुसते उस कक्षा में दंगल होता क्यूँकि वो  विद्यार्थीयों  को ऐसे पीटते जैसे दूसरे के खेत में किसी ने अपना बछड़ा छोड़ दिया हो और उस खेत का मालिक आ गया लठ लेकर बिना सोचे समझे सूते जाओ। हर विद्यार्थी का हाथ पैर काँपने लगता उनको आता देख या उनके बारे में कोई बात भी कर ले। जी हाँ! मैं हूँ वो जिसने उनसे पंगा लिया! मैं हूँ वो फ़ौजी अपने स्कूल के विद्यार्थी संग का जाँबाज़ सैनिक जिसको हौसला और भरोशा था कि वो इस शोषण भरे काल का अंत करेगा।   सरकारी स्कूल में पढ़ने का सबसे बड़ा नुक़सान सिर्फ़ लड़के और लड़कियों का स्कूल उसके बग़ल में केवल बारह फ़ीट की दीवार। पी. टी. आई.   साहेब को जिस कक्षा के बच्चों की ज़्यादा शिकायतें आतीं वो उन विद्यार्थियों को नहीं मारते जो बदमाशी करते बल्कि पूरी कक्षा को प्रार्थना मैदान में प्रार्थना के बाद सुबह-सुबह मुर्ग़ा बना कर उसके बाद पीछवाड़े पे लात मारते और बोलते दुबारा मुर्ग़...

मैं बहुत रोया !!!

मैं बहुत रोया मैं बहुत रोया अपनो में गैर होके मैं बहुत रोया मैं बहुत रोया दर्द की चादर ओढ़कर सिसक भरी करवटें लेकर आह की साँस भर भर के मैं बहुत रोया मैं बहुत रोया