Skip to main content

धूप मेरी माँ की फटकार लगे है -





धूप मेरी माँ की फटकार लगे है 
धुल उसकी थपथपी। ... 
खेत के कंकड़ बापू के ताने 
बैल की हिनहिनाहट ताऊ के गाने। ... 
रोज़ मैं जीऊं मौज़ में जाऊं 
रोटी प्याज खा के और ने सुख देउँ ... 
अन्न जीवन स्त्रोत है और अन्न पैदा करने वाला कौन है 
कद्र न करते तुम जो छावं में सांस भरते 
कभी तुम भी माँ की फटकार धुल की थपथपी और बापू के ताने और ताऊ के गाने सुनने खेतों में आओ !!!



chichi 

Comments

Popular posts from this blog

जर्सी No.7 - COMING SOON

जर्सी No.7 ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी की कहानी है जिसका जुनून, सनक, पागलपन, बौखलाहट, उधेड़बुन, ख़्वाहिश, आरज़ू, उम्मीद, सफलता सिर्फ़ और सिर्फ़ उसका खेल। दूसरी तरफ एक ज़िम्मेदार पुत्र की तरह परिवार के लिए ख़ुद के जुनून को जलाकर उसकी भस्म की अग्नि को हृदय में लिए जिए जा रहा है।  

मेरी आवाज़ में ये जो शोर है

मेरी आवाज़ में ये जो शोर है...  ये मैं नहीं कोई और है....  काय काय करता जिस्म चितचोर है....  चारों तरफ मचा कोलाहल ये कैसा दौर है। ... - चीची 

मैं बहुत रोया !!!

मैं बहुत रोया मैं बहुत रोया अपनो में गैर होके मैं बहुत रोया मैं बहुत रोया दर्द की चादर ओढ़कर सिसक भरी करवटें लेकर आह की साँस भर भर के मैं बहुत रोया मैं बहुत रोया